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अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई, जगत में दो दिन का मेहमान भजन लिरिक्स

अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।

झूठी माया झूठो संसार,
झूठी दुनियां री शान,
एक दिन सब कुछ छोड़ के जावणो,
खाली रह जासी मकान,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।

रुपया पैसा साथ न चाले,
ना चाले धन-दौलत,
राम नाम ही साथ निभावे,
बाकी सब है दौलत झूठ,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।

राजा होवे चाहे भिखारी,
सबने एक दिन जावणो,
काल बुलावो जब आ जावे,
कोई नहीं बच पावणो,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।

भजन करो रे हरि का प्यारा,
समय हाथ से जावे,
मानव जन्म अनमोल मिल्यो है,
बार-बार नहीं आवे,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।

संत जनों ने बात बताई,
सांचो यही विधान,
हरि चरणां में ध्यान लगावो,
मिलसी सच्चो ज्ञान,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।

अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान,
अमर नहीं रेवणो रे म्हारा भाई,
जगत में दो दिन का मेहमान।।


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