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मैं तो अरज करूँ गुरु थाने, चरणां में राखजो म्हाने भजन लिरिक्स

मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने,
चरणां में राखजो म्हाने,
शरणां में राखजो म्हाने।।

जग में देख्या बहुत तमाशा,
कोई ना आयो काम,
थारी शरण में आयो गुरुवर,
करजो बेड़ा पार,
मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने।।

मोह माया में फंस्यो जीवड़ो,
भूल गयो भगवान,
ज्ञान ज्योत जगावो गुरुवर,
दिखलावो सच्चो ज्ञान,
मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने।।

काम क्रोध अर लोभ विकारा,
मन ने बहुत सतावे,
सत्संग री गंगा में गुरुवर,
म्हाने रोज नहलावे,
मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने।।

थारी कृपा बिना गुरुदेवा,
कोई नहीं आधार,
जीवन नैया डगमग डोले,
थामो इसकी पतवार,
मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने।।

अंत समय जब आवे मेरो,
छूटे तन अर प्राण,
गुरु चरणां की धूल मिलाजो,
यही रहे अरमान,
मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने।।

मैं तो अरज करूँ गुरु थाने,
चरणां में राखजो म्हाने,
चरणां में राखजो म्हाने,
शरणां में राखजो म्हाने।।

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