Posted in

भारी लागो दरबार जोगणिया भजन लिरिक्स

भारी लागो दरबार,
जोगणिया थारो,
भारी लागो दरबार,
हो मैया जी थारो,
भारी लागो दरबार
।।


निम्बाहेड़ा दक्षिण दिशा में,
बैठी आसन मार।
खड़क खप्पर त्रिशूल चक्र ले,
होकर के सिंह पे असवार।।


जगतारन जगदीश्वरी जी,
कारज देवे सार।
विघ्न विनाशक शंकरी,
भरे है पुरण भण्डार।।


भीड़ पड़ी भक्ता में,
प्रकट हुई अवतार।
पथ राखी परमेश्वरी जी,
सूंड मुंड को दे मार।।


बद्री मोहन सांखला जी,
रटन करे हर बार।
नाना कन्हैया शभु को,
भवतारन भव पार।।


भजन भंडार


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *